
राजसमन्द ( दिव्य शंखनाद ) 22 जून 2025 | राजसमन्द स्थित ICAI (भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान) की Work-Life Balance समिति द्वारा आज अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में एक प्रेरणादायक योग सत्र का आयोजन किया गया। यह आयोजन न केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को समर्पित था, बल्कि आत्मिक संतुलन और ऊर्जा जागरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी सिद्ध हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत आर्ट ऑफ लिविंग के अनुभवी योग प्रशिक्षक श्री सम्पत लड्डा के सान्निध्य में हुई, जिसमें उन्होंने श्वास नियंत्रण, शरीर और मन की एकाग्रता के लिए विभिन्न योगासन और ध्यान की तकनीकों का अभ्यास करवाया।
इसके पश्चात प्रातः 8 से 9 बजे तक आयोजित द्वितीय सत्र में पतंजलि योगपीठ के योगगुरु श्री रामजी लाल चौबीसा द्वारा प्रतिभागियों को विभिन्न योगासनों व प्राणायाम की विधियां सिखाई गईं, जिससे उपस्थितजन न केवल तन से, बल्कि मन से भी ऊर्जावान अनुभव कर सके।
राजसमन्द शाखा के चेयरमैन सीए दिनेश चन्द्र सनाढ्य ने अपने वक्तव्य में पतंजलि योग सूत्र में वर्णित अष्टांग योग के आठ अंगों – यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान एवं समाधि – पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ये केवल शारीरिक क्रियाएं नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन को संतुलित व सशक्त बनाने की आध्यात्मिक प्रक्रिया है।
उन्होंने बताया कि—”यम” सामाजिक व नैतिक आचरण का आधार है, “नियम” आत्म अनुशासन को सुदृढ़ करता है, “आसन” शरीर की स्थिरता व स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है, “प्राणायाम” श्वास नियंत्रण के माध्यम से आंतरिक ऊर्जा को जाग्रत करता है, “प्रत्याहार” इंद्रियों पर संयम लाना सिखाता है, “धारणा” एकाग्रता की ओर अग्रसर करती है, “ध्यान” गहन आत्मचिंतन का माध्यम है, तथा “समाधि” ब्रह्म से एकत्व की अवस्था को दर्शाती है।
इस अवसर पर सीए मयंक एन. राठी, सीए प्रिंस श्रीमाली, सीए डी. एस. मेहता, सीए सुनील बूब, सीए संजय कोठारी, सीए कोमल चण्डक, सीए रोनक के. सोलंकी, हर्षित शर्मा, चेतन सहित अनेक गणमान्य सदस्यों ने सक्रिय भागीदारी निभाई एवं वर्षभर नियमित योग अभ्यास का संकल्प लिया।
योग दिवस पर यह आयोजन ICAI राजसमन्द शाखा के प्रयासों द्वारा समाज को एक सशक्त संदेश देता है – कि योग केवल एक दिन की क्रिया नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन का विज्ञान है। आइए, इस प्राचीन परंपरा को अपनाएं और स्वयं को स्वस्थ, शांत व समर्पित जीवन की ओर अग्रसर करें।


