“नवीन जल स्रोतों के उदगम से गौ माता की जल सेवा एवं पर्यावरण की वृद्धि एवं संरक्षण संभव” – श्री विशाल बावा

नाथद्वारा ( दिव्य शंखनाद ) 07 जुलाई | पुष्टिमार्गीय प्रधान पीठ प्रभु श्री नाथ जी की हवेली में गौशालाओ में हो रहे नवाचार एवं गौ माता के जल के सुखार्थ जल की कमी को देखते हुए जल पूर्ति एवं गौ माता के सुख के लिए गो.ति.108 श्री राकेश जी (श्री इंद्रदमन जी) महाराज श्री की आज्ञा एवं श्री विशाल बावा की प्रेरणा एवं निर्देशन में नाथुवास गौशाला में पहली बार प्राचीन बावडियो से जल पूर्ति के अतिरिक्त नए जल स्रोत के रूप में प्रथम बार ट्यूबवेल के रूप में नवीन जल स्रोत का शुभारंभ किया गया ।

ग्यारस के शुभ अवसर पर नवीन जल स्रोत के रूप में जहां नवीन जल स्रोत श्रीजी प्रभु की कृपा से यमुने महारानी के रूप में पचपन (55) फीट पर ही स्वयं प्रकट हुई व जिसे छह सौ(600)फीट की गहराई तक किया गया है जिससे भविष्य में नाथुवास गौशाला में कभी भी गौ माता की जल सेवा के लिए जल की कमी नहीं रहेगी । ज्ञातव्य है कि इससे पूर्व श्रीजी प्रभु की नाथुवास गौशाला के जल की पूर्ति नाथुवास गौशाला के सामने स्थित कुंज बिहारी जी मंदिर की बावड़ी से जलापूर्ति होती रही है, लेकिन गर्मी में जल की कमी एवं अधिक से अधिक जल सेवा गौ माता के सुखार्थ हो सके इस बात को ध्यान में रखते हुए तिलकायत श्री की आज्ञा एवं श्री विशाल बावा के निर्देशन में प्रथम बार इस तरह के नवीन जल स्रोत का शुभारंभ किया गया है।
वही श्री विशाल बावा की प्रेरणा से कुंज बिहारी जी की बावड़ी को सभी गौशाला के सेवकों एवं ग्वाल बालों द्वारा विशेष स्वच्छता अभियान के तहत स्वच्छ किया गया जिससे की अधिक से अधिक गौ माता को स्वच्छ जल मिल सके। इस अवसर पर श्री विशाल बावा ने बताया कि तिलकायत श्री की आज्ञा से आगे भी श्रीनाथजी प्रभु की सभी गौ शालाओं में इसी तरह के विशेष जल अभियान के तहत अधिक से अधिक नवीन जल स्रोतों की व्यवस्था की जाएगी जिससे कि किसी भी गौशाला में गौ माता की जल सेवा में कमी न आए एवं नवीन जल स्रोतों के द्वारा गौशाला एवं आसपास के क्षेत्र में पर्यावरण की वृद्धि एवं संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाकर एवं उनका संरक्षण एवं पोषण कर पर्यावरण एवं गौ माता की सुख में वृद्धि की जा सके ।
इस अवसर पर नाथूवास गौशाला के हेड ग्वाल नारायण गुर्जर,शैलेंद्र गुर्जर,बल्लभ गुर्जर,मांगीलाल गुर्जर, दिलीप गुर्जर, विजय गुर्जर आदि ग्वाल सेवक उपस्थित थे जिनके प्रयासों से यह अभियान चलाया गया ।


