
नाथद्वारा ( दिव्यशंखनाद ) 12 जुलाई | |आषाढ़ी पूर्णिमा जिसे सनातन में गुरु पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है उस अवसर पर श्रीनाथजी की नगरी में स्थित व्यायाम शालाओं में कुश्ती का आयोजन होता है| यह अखाड़ा श्रीनाथजी मंदिर से श्रीनाथजी की गौशाला की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित है | इस अखाडे में गुरु पूर्णिमा के एक दिवस पश्चात अर्थात श्रावण कृष्ण पक्ष एकम को यह परंपरा निभाई जाती है |

यहां पर नियमित रूप से भी कई पहलवान प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं | विशेषता यह है कि यह कुश्ती मिट्टी के अखाड़े में परंपरागत रूप से होती है | उल्लेखनीय यह भी है कि गुरु पूर्णिमा के अवसर पर श्री हनुमान जी की सर्वप्रथम पूजा – अर्चना की जाती है और वंदना की जाती है | तत्व पश्चात अखाड़े के उस्ताद को गुरु स्वरूप मानकर उनका भी अभिनंदन किया जाता है स्वागत किया जाता है |तत्पश्चात अखाड़े सहित नगर के अन्य पहलवान यहां पर कुश्ती लड़कर जोर आजमाइश करते हैं| यह परंपरा प्राचीन काल से यह निभाई जा रही है |
यह भी उल्लेखनीय है कि नाथद्वारा स्थित अखाड़े को श्रीनाथजी के मंदिर का प्रेशय प्राप्त है और उनकी तरफ से यहां पर सहायता भी प्रदान की जाती है| गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष में अखाड़े के उस्ताद श्रीमान कन्हैयालाल जी सनाढ्य का उपरना ओढाकर कर सम्मान किया गया। इस अवसर पर गोविंद सनाढ्य, दिनेश सनाढय,भोला, दुर्गेश सनाढ्य, सीए गोविंद सनाढ्य, मनसुख सनाढ्य, श्यामसुंदर सनाढ्य व जयेश सनाढ्य व नगर के कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे |


