
नाथद्वारा ( दिव्य शंखनाद ) 13 जुलाई | सावन का महीना शुरू हो चुका है और 2025 में इस बार सावन में 4 पावन सोमवार पड़ रहे हैं. पहला सोमवार 14 जुलाई को है और आखिरी सोमवार 4 अगस्त को. हिंदू धर्म में सावन को भगवान शिव की आराधना का सबसे शुभ महीना माना गया है.
क्या सावन में सोलह सोमवार व्रत शुरू करना चाहिए?
अक्सर यह प्रश्न उठता है कि सोलह सोमवार व्रत कब से आरंभ करना चाहिए। यह व्रत कार्तिक माह में भी किया जा सकता है, लेकिन धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन में पड़ने वाले सोमवार से इसे शुरू करना सबसे उत्तम माना जाता है।
इस वर्ष 14 जुलाई को सावन का पहला सोमवार है, जो इस पावन व्रत की शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ माना जा रहा है। यदि आप किसी विशेष इच्छा को पूरा करना चाहते हैं, जैसे कि मनचाहा जीवनसाथी या पति की लंबी उम्र, तो सावन से इस व्रत को आरंभ करना महादेव और माता पार्वती को प्रसन्न कर सकता है।
पूजा की थाली में आवश्यक सामग्री
सोलह सोमवार व्रत की पूजा विधि सरल और पवित्र है। इसके लिए कुछ विशेष सामग्री की आवश्यकता होती है, जो भगवान शिव को प्रिय हैं। आपकी पूजा की थाली में निम्नलिखित चीजें होनी चाहिए:
भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग, गंगा जल (शुद्धि के लिए),दूध, दही, घी और शहद (पंचामृत बनाने के लिए), सफेद चंदन (शीतलता के लिए), फूल और माला (अर्पण के लिए), अक्षत (अखंड चावल), बेलपत्र (महादेव का प्रिय), धतूरा और भांग (भोलेनाथ को प्रिय), अगरबत्ती और धूप (सुगंध के लिए), फल और मिठाई (प्रसाद के लिए), माता गौरी के श्रृंगार का सामान (अखंड सौभाग्य के लिए)|
सोलह सोमवार व्रत की पूजा विधि :
सोलह सोमवार व्रत की पूजा विधि बहुत सरल है, जिसे कोई भी भक्त आसानी से कर सकता है:
व्रत के पहले सोमवार को सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें। स्नान के पानी में थोड़ा काला तिल मिलाकर स्नान करें, जिससे शरीर और मन की शुद्धि होती है। स्नान के बाद भगवान शिव के समक्ष सोलह सोमवार व्रत का संकल्प लें। इसका अर्थ है कि आप पूरी श्रद्धा के साथ सोलह सोमवार तक इस व्रत को निभाएंगे। अब शिवलिंग का गंगाजल से अभिषेक करें और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते हुए पंचामृत चढ़ाएं। शिवलिंग पर सफेद चंदन, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित करें। इसके बाद धूप-दीप और अगरबत्ती जलाकर भोलेनाथ की स्तुति करें। अंत में, शिव चालीसा और शिव पुराण का पाठ करें और आरती करें। इस प्रकार आप श्रद्धा से अपना पहला सोलह सोमवार व्रत संपन्न कर सकते हैं।
सोलह सोमवार व्रत के अद्भुत लाभ :
सोलह सोमवार व्रत के कई अद्भुत लाभ माने जाते हैं, खासकर जब इसे सावन जैसे पवित्र महीने में शुरू किया जाए। यह व्रत केवल शारीरिक उपवास नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और मनोकामना पूर्ति का एक सशक्त माध्यम है।
शीघ्र विवाह और मनचाहा जीवनसाथीः कुंवारी कन्याएं यदि यह व्रत निष्ठा से करती हैं, तो उन्हें योग्य वर की प्राप्ति होती है। अखंड सौभाग्य और लंबी आयुः सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए यह व्रत करती हैं। समस्त पापों का नाशः यह व्रत करने से व्यक्ति के ज्ञात-अज्ञात सभी पापों का नाश होता है। धन-धान्य और सुख-समृद्धिः महादेव अपने भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न होते हैं और उन्हें धन, धान्य, सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। मानसिक शांति और सकारात्मकताः व्रत के दौरान की जाने वाली पूजा से मन को शांति मिलती है।


