जुलाई में होगा जिलेभर में हरियाली छिड़काव

राजसमंद ( दिव्यशंखनाद ) 16 जुलाई | सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ की प्रेरणा से राजसमंद जिले में जुलाई माह में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कई महिलाएं और युवतियां मिलकर 50,000 सीड बॉल्स (बीज गोले) का छिड़काव करने जा रही हैं। खास बात यह है कि इन बीजों को पारंपरिक तरीकों की जगह गुलेल से पहाड़ियों और दुर्गम इलाकों में फेंका जाएगा, जिससे अधिकतम क्षेत्रों तक हरियाली पहुंच सके। यह अभियान सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ के नेतृत्व और प्रोत्साहन का प्रत्यक्ष प्रमाण है, जिन्होंने ग्रामीण महिलाओं को न केवल पर्यावरण का महत्व समझाया, बल्कि उन्हें इस आंदोलन की रीढ़ बनाया।
हरियाली का यह आंदोलन बन गया है जिले की पहचान
सामाजिक कार्यकर्ता भावना पालीवाल का कहना है की पिछले सात वर्षों से लगातार चल रहा एक हरित आंदोलन है। इसकी शुरुआत कॅरियर महिला मंडल देवगढ़, कॅरियर संस्थान राजसमंद और माय भारत राजसमंद के सहयोग से हुई थी, लेकिन अब यह अभियान एक व्यापक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। जिले की सैकड़ों महिलाएं हर वर्ष मानसून के समय सीड बॉल तैयार कर, उन्हें पहाड़ियों, जंगलों और बंजर क्षेत्रों में छिड़कती हैं। इस अभियान के माध्यम से अब तक लगभग दो लाख से अधिक बीज बॉल्स का छिड़काव किया जा चुका है। इसके पीछे सोच यही है कि मानसून के मौसम में जब वर्षा होती है, तो इन बॉल्स से बीज अंकुरित हो जाते हैं और प्राकृतिक रूप से पौधों का विकास शुरू होता है।
सांसद महिमा कुमारी की पहल से जागी जनचेतना
सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ ने अपने कार्यकाल की शुरुआत से ही पर्यावरण संरक्षण को प्रमुखता दी है। इस वर्ष महिलाओं को सीड बॉल बनाना सिखाना, उन्हें इसके लिए सामग्री उपलब्ध कराना और फिर छिड़काव में उनकी सहभागिता सुनिश्चित करना—इन सभी चरणों में सांसद महिमा कुमारी स्वयं सक्रिय रहती हैं। उनका मानना है कि जब महिलाएं किसी अभियान का हिस्सा बनती हैं, तो वह केवल अभियान नहीं रहता, वह एक संस्कृति बन जाता है।
सांसद का आह्वान: हर नागरिक बने हरियाली रक्षक
सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ ने इस अभियान को लेकर संदेश देते हुए कहा, “पर्यावरण संरक्षण किसी एक संगठन या सरकार की ज़िम्मेदारी नहीं है। यह हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है। महिलाएं और बेटियाँ जिस समर्पण से सीड बॉल बना रही हैं, वह प्रेरणादायी है। मैं सभी नागरिकों से आह्वान करती हूँ कि वे इस आंदोलन का हिस्सा बनें और जहां भी संभव हो, बीजों का प्रसार करें। यही सच्ची राष्ट्र सेवा और भविष्य सेवा है।

