श्रीद्वारकाधीश मंदिर में कल सोने-चांदी के हिंडोलना में विराजे प्रभु

राजसमंद ( दिव्यशंखनाद ) 23 जुलाई | श्री पुष्टिमार्गीय तृतीय पीठ प्रन्यास के श्री द्वारकाधीश मंदिर कांकरोली में आज पीली घटा के दर्शन होंगे| बुधवार को श्रावण मास का 13वां दिन है । शाम और शयन के दर्शन में भक्तों को पीली घटा में हिंडोलना के दर्शन प्राप्त होंगे।
श्री पुष्टिमार्गीय तृतीय पीठ प्रन्यास के श्री द्वारकाधीश मंदिर कांकरोली में मंंगलवार को श्रावण कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी (क्षय तिथि) पर श्री बालकृष्णलालजी (1924) और श्रीद्वारकाधीशजी का दूसरा मनोरथ हुआ। इस विशेष दिन के चलते मंगला दर्शन सुबह 6 बजे ही खुल गए। श्रृंगार दर्शन में प्रभु के श्रीमस्तक पर गुलेनार दुमाला संग हीरा का सेहरा, गुलेनार बड़ा पिछोड़ा, वैसा ही अंतवास का पटका, हीरा, पन्ना, माणक की दो जोड़ी के श्रृंगार, हरे ठाड़े वस्त्र, माला और चरण चौकी सुशोभित थी। ग्वाल के दर्शन 9:30 बजे हुए, इस दौरान प्रभु द्वारकाधीश के सम्मुख अनेक खिलौने रखकर उन्हें रिझाया गया। प्रभु की नजर उतारने के लिए चांदी और सोने का झुंझुना बजाया गया।
राजभोग झांकी दर्शन सुबह 11 बजे खुले, जिसमें बड़ी संख्या में हालौल और बड़ौदा के वैष्णव जनों सहित स्थानीय श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। राजभोग दर्शन के समय गोस्वामी पराग कुमार महाराज और गोस्वामी नैमिष कुमार ने एक साथ प्रभु द्वारकाधीश की आरती की। दोहरा मनोरथ होने के कारण श्री बालकृष्णलालजी द्वारा प्रत्येक आरती दो हुई और सोने व चांदी के दो हिंडोलना के दर्शन भक्तों को हुए। श्रीबालकृष्णलालजी महाराज द्वारा आयोजित इस दोहरे मनोरथ के चलते श्री द्वारकाधीश प्रभु को प्रात: मंगला के दर्शनों से ही सभी दर्शनों में दुगना भोग अरोगाया गया।
शाम को उत्थापन के दर्शन के पश्चात श्रीद्वारकाधीश प्रभु को सोने के हिंडोरे में विराजित किया गया। रतन चौक में, स्वर्ण हिंडोरे में श्री द्वारकाधीश प्रभु को और चांदी के हिंडोलना में श्री महाप्रभु जी को झूला झुलाया गया। मुखिया भीतरियाओं ने पंखा और चंवर डुलाकर तथा कीर्तनियों ने विशेष कीर्तन का गान किया। श्री द्वारकाधीश प्रभु के सामने विभिन्न रंगों में सुसज्जित चांदी के ग्वाल-बालों, गोपियों और पशु-पक्षियों की आकर्षक झांकी सजाई गई। स्वर्ण हिंडोरे के दर्शन शयन में भी हुए, जिसमें गोस्वामी परिवार ने फिर से दोहरी आरती की।


