प्रभु सेवा में स्थानीय वैष्णव जन व नागरिकों की भागीदारी हेतु सेवा एवं व्यवस्था के लिए और भी होगा समितियां का गठन”.. श्री विशाल बावा

नाथद्वारा ( दिव्य शंखनाद ) 11 अगस्त | पुष्टिमार्गीय प्रधान पीठ प्रभु श्रीनाथ जी की हवेली में नवाचारों के तहत श्रीजी प्रभु की हवेली के पीठाधीश्वर गो.ती.108 श्री राकेश जी (श्री इंद्रदमन जी) महाराज श्री की आज्ञा एवं गो.ची. 105 श्री विशाल बावा की प्रेरणा से स्वर्ण युग प्रदाता नित्य लीलास्थ गोस्वामी तिलकायत श्री गोवर्धन लाल जी महाराज श्री के पावन उत्सव पर श्रीमान हुजूर तिलकायत महाराज श्री द्वारा नाथद्वारा दर्शन सर्वांगीण विकास समिति एवं नगर सुविधा एवं सहयोग समिति के गठन के माध्यम से श्रीजी प्रभु के सुखार्थ नगर वासियों तथा वैष्णव वृंद की समस्त सुविधाओ जिसमें दर्शन व्यवस्था,स्वास्थ्य, एमरजैंसी केयर,धर्म रक्षार्थ,पुष्टि प्रचार,समस्त विधिक प्रावधानों व वास्तु योजना आदि को दृष्टिगत रखते हुए नगर के सभी क्षेत्र के विशेषज्ञों को सम्मिलित कर समितियों के माध्यम से उनकी सेवाओं का प्रभु की सेवा में समर्पण हेतु समितियों के निर्माण का निर्णय लेकर स्वर्ण युग प्रदाता श्री गोवर्धन लाल जी महाराज श्री के पावन उत्सव पर तिलकायत श्री द्वारा दो समितियां के गठन की घोषणा की गई जिनमें प्रमुख रूप से
1 दर्शन सर्वांगीण विकास समिति.. समिति के प्रमुख सदस्यों में श्री डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद, श्री प्रमोद सनाढ्य,श्री दशरथ सिंह,श्री मनोज लखोटिया,श्री ध्रुव तिवारी,श्री निशांत गुर्जर ।
2 नागरिक सुविधा एवं सहयोग समिति.. प्रमुख सदस्यों के रूप में श्री गिरीश जी पालीवाल (विद्रोही),श्री ईश्वर सिंह सामोता,श्री डॉ.बी एल जाट,श्री तुलसीदास सनाढ्य,श्री लक्ष्मण सिसोदिया,श्री तन्मय पालीवाल को सदस्य के रूप में चुना गया। सभी सदस्य अपनी समितियो के माध्यम से तिलकायत श्री को अपने सुझाव व स्थानीय नागरिकों व वैष्णव जन से आमंत्रित सुझावों पर विचार कर अपनी ओर से प्रभु सेवा एवं वैष्णव जन की सुविधा हेतु उत्तम से उत्तम व्यवस्था सुधार हेतु सुझाव प्रेषित करेंगे।
गौसेवा,शिक्षा, चिकित्सा, जलाशय, पर्यावरण, कला संस्कृति,पुष्टि प्रचार आदि क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए ऐसे सहयोगी व्यक्तियों की सूची तैयार की गई है जो प्रभु के सेवा कार्य में अपना प्रत्यक्ष सहयोग एवं सेवा दे सके।
श्री विशाल बावा ने कहा कि यह एक शुभारंभ है जिसे समितियों के माध्यम से प्रथम चरण के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, भविष्य में आगे भी और पूज्यपाद तिलकायत महाराज श्री की आज्ञा से अन्य स्थानीय वैष्णव जन व नागरिकों को सेवक के रूप में जोड़ा जाएगा ताकि प्रभु एवं नगर दोनों की सेवा एवं व्यवस्था का विकास सुचारू रूप से होता रहे।

