
जयपुर ( दिव्य शंखनाद ) 01 सितम्बर | नाथद्वारा मंदिर अधिनियम को राज्यपाल ने लौटा दिया है|। राज्यपाल ने कहा इस विधेयक से राज्य सरकार की शक्तियां क्षीण हो जाती हैं। इस संशोधन से राजस्थान मंदिर अधिनियम –1959 में प्रस्तावित संशोधन से राज्य सरकार की शक्तियां क्षीण हो जाती हैं। मंदिर मंडल पर श्री तिलकायत जी के वंशजों को एकाधिकार हो जाता है।
इस संशोधन से आम जन को कोई लाभ होता नहीं दिख रहा। बल्कि वंशानुगत आधिपत्य स्थापित होता है, जो राज्य सरकार की छवि के खिलाफ है। राज्य सरकार का नियंत्रण कमजोर होने से श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाएं बनाए रखने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। कानून और व्यवस्था बनाए रखने और श्रद्धालुओं की व्यवस्था रखने में कठिनाई होगी। इसके अतिरिक्त बाहरी राज्यों की संपत्तियों को मंदिर की परिभाषा में शामिल करने से, अनावश्यक न्यायिक विवाद पैदा हो सकते हैं। इसलिए मैं हरिभाऊ बागडे इस विधेयक को पुनर्विचार के लिए लौटा रहा हूं |


