
मुंबई ( दिव्य शंखनाद ) 15 सितम्बर | श्रीगोपीनाथजी यूथ ओर्गनाईसेशन की मुंबई शाखा के द्वारा दिनांक- १३ सितम्बर २०२५ शनिवार सायं ६ः३० से ९ बजे तक इसकोन ओडिटोरिम – जूहू – मुंबई में आचार्यश्री रणछोडलालजी की हवेली संगीत सभा आयोजित की गई ।
इसमें पुष्टि संगीत अर्थात् हवेली संगीत कि जिसमें आचार्य श्री द्वारा विविध शास्त्रीय राग रागिणीओ में गाने वाली पदावलीयां – कीर्तन तथा कुछ विशेष लोक परंपरा के गीत – जिनमें गुजराती और कच्छी भाषा के धौल-पद व ब्रजभाषा के दानलीला के रसिया भी प्रस्तुत किए गए ॥

सभा का आरंभ शास्त्रीय कीर्तनों से हुआ जिसमें भक्तवर्य कुंभनदास कृत “हमारो दान देहो गुजरेटी”(राग देवगंधार) , कवि सूरदास रचित दानलीला – “गढ तें ग्वालिन उतरी” (राग बिराडी बिलावल), तेरो री गिरधारी लाल (राग- कालिंगडा) जैसी अप्रचलित रचनाएं प्रस्तुत की गई । इसके बाद लोकगीतों में सोरठ प्रदेश का धौलपद माधवदास कृत “नंदननंदन रसीला”, कच्छ प्रदेशका “नेरो जसोदाजी” , दयाराम कवि रचित नर्मदा क्षेत्र का “आठ कूवा ने नव वावडी” तथा ब्रज का रसिया “इकली घेरी बन में” प्रस्तुत किया गया, जिसमें श्रोता भक्तिरस में झूमने लगे । संगत में आचार्य के शिष्य सहगायकों के साथ साथ सारंगी, झांझ तथा पखावज के वाद्यों का प्रयोग किया गया॥

उल्लेखनीय हैं कि अहमदाबाद गोस्वामी हवेली के आचार्य श्रीरणछोडलालजी ख्यातनाम धर्माचार्य होने के साथ-साथ विख्यात म्यूजिकोलोजिस्ट – क्रिटिक और कुशल कलाकार भी है ॥ मुंबई के इस कार्यक्रम में विविध विशेष अतिथि महानुभाव, संगीतकार तथा भारी संख्या में कृष्ण भक्त शामिल हुए ॥ इस कार्यक्रम की सफलता को देखते हुए गोपीनाथजी यूथ ओर्गनाईसेशन के माध्यम से बताया गया कि – यह पंरपरा भक्ति के साथ साथ भारतीय संस्कृति की अलभ्य विरासत भी होने से इसका संरक्षण- संवर्धन बहुत जरूरी है इसलिए आचार्य जी द्वारा ही आगामी दिनों में फिर से मुंबई में एसे कई कार्यक्रम होने प्रस्तावित हैं जिसकी जानकारी जल्द ही जारी की जाएगी ।


