साहित्य मंडल एक चंदन का वृक्ष है , जो हर एक को अपनी महक बाँटता है – डॉ अमर सिंह

नाथद्वारा ( दिव्यशंखनाद ) 15 सितम्बर | साहित्य मंडल श्रीनाथद्वारा द्वारा आयोजित”हिंदी लाओ देश बचाओ” समारोह श्री भगवती प्रसाद देवपुरा प्रेक्षागृह में देश भर से आए साहित्यकारों के बीच में शुरू हुआ। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि पूर्व कुलपति एवं साहित्यकार प्रोफेसर गिरीश्वर मिश्र ने कहा “जब तक हम विचारों में स्वाधीन नहीं होंगे, तब तक सतही परिवर्तन नहीं होंगे। आज लोगों को आपस में जुड़ने के लिए हिंदी से जुड़ना होगा। हिंदी को अपनाना होगा। आज हिंदी सिर्फ भाषा का प्रश्न नहीं है, यह हमारी पहचान है। यह हमारी संस्कृति है। यह हमारी एकता है।”
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि उड़ीसा से पधारे प्रशासनिक अधिकारी एवं पूर्व कुल सचिव डॉ राजेंद्र प्रसाद मिश्र ने कहा “हिंदी सभी को जोड़ती है। मैं हिंदी से जुडा तो सबसे जुड़ा हूं ।हिंदी पढ़ने के कारण मैं आज यहां आ सका। भाषा सीखने से व्यक्ति का ज्ञान बढ़ता है ।हिंदी भाषा होने के बावजूद हमारी अपनी पहचान हिंदी है ।हिंदी होते ही हम अखिल भारतीय हो जाते हैं ।”
इस अवसर पर लखनऊ से पधारे विशिष्ट अतिथि डॉ ओम नीरव ने कहा ” हम चाहते हैं कि हिंदी पूरब से पश्चिम, उत्तर से दक्षिण हर क्षेत्र में अपनाई जाए तो इसके लिए सबसे पहले हमें दूसरी भाषाओं को भी उतना ही सम्मान देना पड़ेगा जितना हम हिंदी के लिए चाहते हैं।” डॉ ओम नीरव ने कहा “राजनीति को राष्ट्रभाषा नहीं बना सकते। यह कार्य सिर्फ साहित्यकार ही कर सकते हैं ।हिंदी का उत्थान और प्रसार तभी संभव है, जब हिंदी में पढ़ना, लिखना, अपनी विवशता हो जाए । “
दिल्ली से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार डॉ राहुल हिंदी के उद्भव और विकास पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा “सरकार आज स्वदेशी का प्रचार करने को कहती है, तो हमें सबसे पहले हिंदी को अपनाना है। हिंदी से ही हमें अपना सभी कार्य करने हैं ।” अमलनेर महाराष्ट्र से पधारे सुरेश जी ने कहा “हिंदुस्तान को बनाने में शिवाजी ने तलवार का प्रयोग किया था। सभी को एकजुट किया था। अब यह कार्य साहित्यकारों को अपनी कलम से करना होगा। तभी हिंदी की विजय निश्चित है। “
इस अवसर पर पंजाब से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार डॉ अमर सिंह बधान ने कहा “साहित्य मंडल एक चंदन का वृक्ष है , जो हर एक को अपनी महक बाँटता है। यह एक साहित्यिक संस्था ही नहीं है, यह प्रेम, सदाचार, उदारता, प्रेरणा , आत्मविश्वास जगाने वाली एक संस्था है। यहां हिंदी के साथ देश की समस्त भाषाओं का सम्मान होता है।”
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ अंजीव अंजुम की गणेश वंदना, श्रीनाथ वंदना,डॉबृजभान नंदनी की सरस्वती वंदना, गुरुकुल विद्यालय के बालक बालिकाओं की गीता श्लोक के साथ शुरू हुई ।अतिथियों ने मां शारदे के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की। इस अवसर पर डॉ व्यासमणी त्रिपाठी पोर्ट ब्लेयर द्वारा अंडमान निकोबार में हिंदी का समृद्धि शाली इतिहास, श्रीमती मानो माला हाजरिका जोरहाट असम द्वारा पूर्वोत्तर राज्य में हिंदी के बढ़ते कदम ,डॉ अवधेश कुमार वर्धा महाराष्ट्र द्वारा हिंदी लोकमंगल से लोग जागरण तक , डॉ एस प्रीति चेन्नई तमिलनाडु में तमिलनाडु में त्रिभाषा नीति की व्यापकता विषय पर हिंदी उपनिषद पढ़ा । इस अवसर पर प्रोफेसर गिरीश्वर मिश्र गाजियाबाद उत्तर प्रदेश को श्री भगवती प्रसाद देवपुरा स्मृति सम्मान एवं हिंदी वाग्भूति कि मानद उपाधि एवं 11000 रुपए राशि, डॉ राजेंद्र प्रसाद मिश्रा उड़ीसा को श्री भगवती प्रसाद देवपुरा स्मृति सम्मान एवं हिन्दी शलाका की मानद उपाधि, डॉ कृष्ण लाल बिश्नोई बीकानेर राजस्थान को ब्रजकांत साहित्य सम्मान, आचार्य ओम नीरव लखनऊ उत्तर प्रदेश को डॉदाऊ दयाल गुप्ता स्मृति सम्मान, डॉ राहुल दिल्ली को श्री जीवन लाल अग्निहोत्री स्मृति सम्मान सहित उपाधियों सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर हिंदी पुरुष श्री भगवती प्रसाद देवपुरा के कृतित्व पर आधारित साहित्य रत्न डॉक्टर राहुल की कृति दिव्यात्मा महाकाव्य का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर नृत्य शिरोमणि की मानवतावादी से आचार्य प्रोफेसर बृजभान नंदिनी वृंदावन उत्तर प्रदेश, डॉ नवल किशोर भाभडा अजमेर को श्रीमती सोनी देवी स्मृति सम्मान, डॉक्टर पुष्पा सिंह विसेन नई दिल्ली को श्रीमती कमलेश गुप्ता स्मृति सम्मान, श्री राजेश कुमार भटनागर जयपुर राजस्थान को श्री मूलचंद पारीक स्मृति सम्मान, डॉ श्याम मनोहर सिरोठिया सागर मध्य प्रदेश को श्री रामस्वरूप सिंगल स्मृति सम्मान, श्री शैलेश पांडेय भीनाश गुजरात को श्री सूरज केसरी फरक्या स्मृति सम्मान, डॉ अखिलेश निगम अखिल लखनऊ उत्तर प्रदेश को श्री अवध नारायण देवी उपाध्याय स्मृति सम्मान के साथ-साथ हिंदी काव्य शिरोमणि की मानद उपाधि से अलंकृत किया गया।
कार्यक्रम का संचालन प्रधानमंत्री श्री श्याम प्रकाश देवपुरा ने किया | गद्य एवं पद्य परिचय का वाचन डॉक्टर अंजीव अंजुम द्वारा किया गया। इस अवसर पर श्री सुरेंद्र सार्थक ने हिंदी पर शानदार कविता पढ़कर तालियां बटोरी।


