रिमझिम फुहारों के बीच प्रभु की विहंगम झांकी के हुए भव्यातिभव्य दर्शन

नाथद्वारा ( दिव्य शंखनाद ) 27 जुलाई | तृतीय पीठाधीश पु. श्री वागीशकुमारजी महाराजश्री के आशीर्वाद से श्री पुष्टिमार्गीय तृतीय पीठ प्रन्यास – कांकरोली द्वारा संचालित श्री द्वारकाधीश मन्दिर – नाथद्वारा में उष्णकाल की सेवा में विशेष मनोरथ के तहत भव्यातिभव्य सावन-भादों मनोरथ सम्पन्न हुआ।
श्री द्वारकाधीश प्रभु श्री लालन के साथ फूलों से सजी कुञ्ज और फुहारों के बीच में बिराजमान हुए। कृत्रिम रिमझिम फुहारों के बीच श्रद्धालुओं ने प्रभु की मनोहारी झांकी के विहंगम दर्शन किये। फूल-पत्तों से सजाई गई निकुंज के भीतर से चारों ओर लगाए गए फव्वारे के बिच व्रज-मण्डल में बिराजमान श्री गिरिराजजी की सघन कन्दरा की दिव्य अनुभूति श्रद्धालुओं ने की। चारों ओर बूंदाबांदी हो रही थी और श्रद्धालुओं ने बड़े उत्साह के साथ आनंद से प्रभु के नयनरम्य दर्शन कर धन्यता का अनुभव किया।
समग्र मन्दिर परिसर में आकाशी बिजली की गड़गड़ाहट के साथ साथ मयूर, कोयल, तोते जैसे पंछिओं की चहचहाट एवं मधुर ध्वनि भी सुनाई दी। नाथद्वारा एवं आसपास के गाँव से पधारे हजारों श्रद्धालुओं ने निकुंज में बिराजमान हुए श्री द्वारकाधीश प्रभु एवं लालन की रिमझिम फुहारों के बीच विहंगम झांकी के दर्शन किए। इस अलौकिक मनोरथ को लेकर श्री द्वारकाधीश मन्दिर – नाथद्वारा में विशेष तैयारियां की गई थी जहां दर्शनार्थियों पर ऊपर से पानी की बौछार के लिए फव्वारे लगाए व जमीन से भी फव्वारे चलाए गए। इस दौरान सावन भादों की मनोहर फुहारों के मध्य प्रभु के अलौकिक दर्शन करने को लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा, शाम करीब आठ बजे तक दर्शन हुए। इस मनोरथ के मुख्य मनोरथी पूर्व पार्षद नरेश जी पालीवाल थे।


