
नाथद्वारा ( दिव्यशंखनाद ) 08 सितम्बर। हिंदू मान्यताओं के मुताबिक सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के दौरान कुछ भी काम करना बेहद अशुभ माना जाता है. साथ ही ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ या मंदिरों में भी न जाने की सलाह दी जाती है. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी भारत में श्रीनाथजी के मंदिर में ग्रहण के दौरान भक्तगण ग्रहण के दौरान भी भगवान के दर्शन करने आते हैं और मंदिर की परिक्रमा भी करते है |

श्रीनाथजी का मंदिर इकलौता ऐसा मंदिर है, जो खग्रास चन्द्र ग्रहण के दौरान भी खुला रहता है. खग्रास चन्द्र ग्रहण के दौरान श्रीनाथजी मंदिर नाथद्वारा में दर्शन होते हैं. ग्रहण काल में सभी नियमों का पालन किया जाता है. ग्रहण काल में श्रद्धालुओं के लिए दर्शन खुले रहते हैं और दुसरी सेवाएं बंद कर दी जाती हैं. इसके पीछे की मान्यता है कि प्रभु श्रीनाथजी को निकुंज नायक का प्रतीक माना जाता है. जिस तरह श्रीनाथजी ने गिरिराज पर्वत को उठाकर ब्रजवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाया था, ठीक उसी तरह उनके मंदिर में दर्शन करने आए भक्तों की वह ग्रह से रक्षा करते हैं. ग्रहण के दौरान गौदान के समय दान पुण्य किए जाते है |

पुष्टिमार्ग की प्रधानपीठ श्रीनाथजी मंदिर में रविवार को खग्रास चंद्रग्रहण पर मंदिर के पट खुले रहें। ग्रहण के दौरान मंदिर में दर्शन की विशेष व्यवस्था की गई। तिलकायत पुत्र विशाल बावा के निर्देशानुसार स्थानीय वैष्णव जन के लिए अलग से प्रीतम पोली गेट से सीधे धोली पटिया से कमल चौक होते हुए सुलभ दर्शन की व्यवस्था की गई।

मंदिर में दोपहर साढ़े चार बजे भोग आरती के दर्शन के बाद श्रीजी प्रभु का शयन हुआ एवं 9 बजकर 15 मिनट पर ग्रहण निमित्त शंखनाद हुआ। इसके बाद ग्रहण के दर्शन आम श्रद्धालुओं के लिए 9 बजकर 55 मिनट पर पट खोले गए। ग्रहण के दौरान गौदान के समय दान पुण्य किए गए और श्रद्धालुओं ने मंदिर की लोटन परिक्रमा भी लगाई गई। वही मंदिर में भोग आरती की झांकी तक का सखडी प्रसाद गोमाताओं के लिए गोशाला में भिजवाया गया। ग्रहण पूर्ण होने के बाद मंदिर की धुलाई की गई।


