
नाथद्वारा (दिव्यशंखनाद ) 11 अक्टूबर। पुष्टिमार्ग की प्रधान पीठ श्रीनाथजी मंदिर में आगामी दिपावली व अनकूट पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जाएगा।पुष्टिमार्गीय वल्लभसंप्रदाय की प्रधान पीठ श्रीनाथजी की हवेली में दीपावली पर्व को लेकर सजावट का कार्य जोर-शोर से जारी है | इस अवसर पर श्रीनाथजी मंदिर में संपूर्ण हवेली में स्थानीय चित्रकारों द्वारा श्रीजी प्रभु की लीलाओं का चित्रांकन किया जा रहा है।

श्रीजीं प्रभु की हवेली तथा नाथुवास गौशाला में चितेरे अपनी कलम से चितराम उकेरने में लग गये है। हर साल दशहरा से चितेरे पांती बांटकर चितराम सेवा शुरु कर देते है। इन दिनों हवेली में श्री महाप्रभु जी की बैठक के बाहर, कमल चौक, अनार चौक, धोली पटिया, सहित कोने कोने में दर्जन भर चितेरे विविध प्रकार के रंगों से हाथी-घोड़े, बेल-बूटे, फूल-पत्ती, गौमाताओं व ग्वाल बालो के साथ मयूर, तोते, शेर के अलावा प्रभु श्री कृष्ण की विविध लीलाओं की मन मोहने वाली चितराम उकेर रहे है। इन चित्रों में राजसी झांकियां, हाथी-घोड़े, रथ, और पारंपरिक श्रृंगार की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। दीपावली पर हर साल हवेली को सुंदर चितराम से सजाया संवारा जाता है।

मंदिर में अलग-अलग जगहों पर स्थान के भाव एवं उसके महत्व के आधार पर लीलाओं का चित्रांकन किया जा रहा है ।चित्राम निर्माण में 15 वर्ष से लेकर 80 वर्ष तक के कलाकार अपनी सेवा दे रहे हैं। यह परंपरा लगभग 351 वर्षों से श्रीजी प्रभु के नाथद्वारा पधारने के समय से प्रभु की हवेली के निर्माण कार्य से निर्बाध रूप से यह चित्रांकन सेवा चली आ रही । कलाकारों द्वारा अंतिम रुप दिया जा रहा है। इन पारंपरिक कलाकारों का मानना है कि यह केवल कला नहीं, बल्कि ठाकुरजी की सेवा का माध्यम है।


